शिवपुरी या बिहार... शिवपुरी जनपद पर बाउंसर किसके लिए लगे हैं? शिवपुरी/ शिवपुरी में अब लोकतंत्र की नहीं, बल्कि दबंगई की सत्ता चल रही है। ज...
शिवपुरी या बिहार... शिवपुरी जनपद पर बाउंसर किसके लिए लगे हैं?
शिवपुरी/ शिवपुरी में अब लोकतंत्र की नहीं, बल्कि दबंगई की सत्ता चल रही है। जनपद पंचायत हो या कोई सरकारी दफ्तर, अब सवाल उठाने वालों के लिए दरवाजे खुले नहीं, बल्कि बाउंसर तैनात हैं। क्या ये किसी माफिया का अड्डा है या कोई सत्ता का किला, जहां जनता के प्रवेश पर पहरे लगा दिए गए हैं❓
जनपद पंचायत जनता के हक और विकास कार्यों का केंद्र होता है, लेकिन जब जनता ही वहां नहीं जा सकती, आम आदमी को अंदर घुसने से रोका जाता है, तो समझ लीजिए कि कुछ न कुछ काला जरूर है। आखिर कौन है, जो अपनी कुर्सी बचाने के लिए लोकतंत्र की हत्या कर रहा है?
क्या शिवपुरी में अब भ्रष्टाचार और घोटालों की आवाज को छिपाने के लिए बाउंसर लगाए जा रहे हैं?
क्या ये लोकतंत्र का प्रशासन है या किसी डॉन की निजी संपत्ति❓
शिवपुरी की जनता को इस सवाल का जवाब चाहिए। अगर अफसर और नेता ईमानदार हैं, तो डर कैसा? दरवाजे जनता और सरपंचों के साथ ग्रामीण आवेदकों के लिए खुलने चाहिए, न कि बाउंसरों की पहरेदारी में बंद होने चाहिए...
शिवपुरी जागेगी, हर सवाल का जवाब मांगेगी
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